आज से अगले 57 दिन ग्रेटर हिमालय की ऊंची वादियों में बाबा बर्फानी के जयकारे गूंजेंगे। अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है। 28 अगस्त तक 4 लाख से ज्यादा श्रद्धालु 3,888 मीटर पर स्थित पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बने शिवलिंग के दर्शन कर सकेंगे।

गुरुवार को जम्मू-कश्मीर LG मनोज सिन्हा ने पहले जत्थे को जम्मू के भगवती बेस कैंप से बालटाल और पहलगाम के लिए रवाना किया। जत्थे में 4,822 तीर्थयात्री शामिल थे, जो 259 वाहनों के सुरक्षा घेरे में रवाना हुए।
कश्मीर में लगातार बारिश और खराब मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन के बाद तुरंत नीचे लौटने की सलाह दी गई है। यात्रा मार्ग पर हर 2 किलोमीटर पर ऑक्सीजन बूथ बनाए गए हैं। वहीं, दोमेल रूट पर चार जगह बड़ी स्क्रीन के जरिए मौसम की जानकारी दी जा रही है।
गौरतलब है कि अमरनाथ यात्रा अनंतनाग में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम रास्ते या गांदरबल जिले में छोटे 14 किलोमीटर लंबे बालटाल रास्ते से की जा सकती है।

दूसरा जत्था भी रवाना
बारिश की वजह से गुरुवार को बालटाल मार्ग पर यात्रा कुछ समय के लिए रोकी गई थी। हालांकि, शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे 3,865 श्रद्धालुओं का दूसरा जत्था भी भगवती नगर बेस कैंप से रवाना हो गया।
इनमें 1,735 श्रद्धालु 115 वाहनों से बालटाल बेस कैंप जा रहे हैं। जबकि 2,130 श्रद्धालु 86 वाहनों से पारंपरिक पहलगाम मार्ग की ओर रवाना हुए।

बालटाल बेस कैंप से अमरनाथ यात्रियों की 6 तस्वीरें….

दोनों रूट पर 100-100 बेड के अस्पताल
दोनों यात्रा मार्गों पर एक हजार डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी तैनात हैं। दोनों जगह 100-100 बेड के अत्याधुनिक अस्थायी अस्पताल बनाए गए हैं।
• बालटाल: यात्रा करते वक्त तबीयत बिगड़ती है तो सबसे पहले डोमेल गेट के पास ही ‘मेडिकल एड सेंटर’ है। फिर रेलपथरी पर इमरजेंसी मेडिकल सहायता केंद्र है। बरारी पर मेडिकल कैंप और ऑक्सीजन मिल जाएगी। फिर संगम टॉप पर आपातकालीन चिकित्सा केंद्र है।
• पहलगाम: नुनवां बेस कैंप पर बड़ा मेडिकल अस्पताल है। चंदनवाड़ी में 100 बिस्तर का मुख्य बेस अस्पताल बनाया गया है। चढ़ाई से पहले यहां जांच करा सकते हैं। पिस्सू टॉप पर भी मेडिकल एड सेंटर है। फिर शेषनाग कैंप में रात्रि विश्राम पड़ाव पर बेस अस्पताल बनाया गया है।

अमरनाथ यात्रा से जुड़े 3 जरूरी फैक्टर
• मोबाइल कनेक्शन: दोनों बेस कैंपों पर बीएसएनएल, जियो और एयरटेल के विशेष काउंटर लगाए गए हैं, जहां यात्री अपनी आईडी दिखाकर यात्रा के लिए उपयोगी अस्थायी पोस्टपेड सिम खरीद सकते हैं। इस इलाके में सिर्फ पोस्टपेड सिम ही काम करती है।
• निवास सुविधा: बालटाल बेस कैंप में 57 लंगर हैं। श्राइन बोर्ड ने कई जगह तंबू लगवाए हैं। 800 रु. तक में बेड मिल जाएंगे। 3 हजार लोगों के लिए विशाल यात्री निवास भी तैयार है। संस्थानों ने भी इंतजाम किए हैं। इस तरह 30 हजार लोग एक साथ कैंप में रुक सकते हैं।
• मौसम अपडेट: मौसम विभाग ने 6 जुलाई तक दोनों रूट पर तेज बारिश की आशंका जताई है।

दो दिन से बालटाल बेस कैंप से गुफा तक रुक-रुक कर बारिश हो रही है। बालटाल रूट पर बरारी से रेलपथरी तक भूस्खलन जोन हैं। इस रूट पर 12 जगह वाटरप्रूफ डोम बनाए हैं।

3.90 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कराया रजिस्ट्रेशन

इस साल अमरनाथ यात्रा के लिए अब तक 3.90 लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। यात्रा शुरू होने के साथ ही जम्मू में ऑन-द-स्पॉट (तुरंत) रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। जिन श्रद्धालुओं ने पहले से पंजीकरण नहीं कराया है, वे तय प्रक्रिया पूरी करके जम्मू में रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इससे अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा में शामिल होने का मौका मिल रहा है।

यात्रा के दौरान किन बातों का ध्यान रखें…
यात्रा के दौरान मेडिकल सर्टिफिकेट, 4 पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, RFID कार्ड, ट्रैवल एप्लिकेशन फॉर्म अपने साथ रखें। फिजिकल फिटनेस के लिहाज से हर रोज 4 से 5 किलोमीटर पैदल चलने की प्रैक्टिस करें। सांस वाला योग जैसे प्राणायाम और एक्सरसाइज करें। यात्रा में ऊनी कपड़े, रेनकोट, ट्रैकिंग स्टिक, पानी बॉटल और जरूरी दवाओं का बैग अपने साथ रखें।
क्या न करें: शराब, धूम्रपान या कैफ़िन का सेवन न करें, किसी बीमार यात्री की हर बात पर विश्वास न करें, ऊंचाई की बीमारी के लक्षणों को नजरंदाज बिल्कुल न करें ।

अमरनाथ यात्रा का इतिहास
1.⁠ ⁠राजतरंगिणी में अमरनाथ को अमरेश्वर कहा गया
अमरनाथ यात्रा की शुरुआत कब हुई, इसका कोई पक्का ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं मिलता। हालांकि, इतिहासकार मानते हैं कि यह यात्रा कई सदियों से चली आ रही है।
6वीं–8वीं शताब्दी के बीच लिखी गई नीलमत पुराण में ‘अमरनाथ गुफा’ नाम का सीधा उल्लेख नहीं है। इसमें कश्मीर के कई पवित्र तीर्थों, बर्फीले स्थानों और शिव पूजा से जुड़े स्थलों का वर्णन मिलता है। कुछ विद्वानों का मानना है कि इनमें अमरनाथ से जुड़े संकेत हो सकते हैं, लेकिन इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है।
वहीं, कल्हण द्वारा 1148–1150 ईस्वी में लिखी गई राजतरंगिणी में गुफा का उल्लेख ‘अमरेश्वर’ नाम से मिलता है। इसमें अमरनाथ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले शेषनाग का भी जिक्र है। इसी वजह से इतिहासकार राजतरंगिणी को अमरनाथ यात्रा का सबसे पुराना स्पष्ट ऐतिहासिक उल्लेख मानते हैं।
इन ऐतिहासिक संदर्भों से माना जाता है कि 12वीं शताब्दी तक अमरनाथ एक प्रसिद्ध तीर्थ बन चुका था और यहां यात्रा की परंपरा स्थापित हो चुकी थी। कई इतिहासकारों का मानना है कि इसकी शुरुआत इससे भी पहले हुई होगी, लेकिन इसके स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

अमरनाथ यात्रा की सबसे पुरानी उपलब्ध तस्वीर। इसे 1898 में जम्मू-कश्मीर के डोगरा महाराजाओं के दरबारी फोटोग्राफर दीवान अलीम चंद ने खींचा था।


2.⁠ ⁠मुगल काल में भी मिलता है अमरनाथ का उल्लेख
16वीं शताब्दी में मुगल बादशाह अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुल फ़ज़ल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक आइने-अकबरी में अमरनाथ गुफा का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि यहां प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है और इसका आकार समय के साथ बदलता रहता है।
इसके बाद 17वीं शताब्दी में कश्मीर आए फ्रांसीसी यात्री फ़्रांस्वा बर्नियर ने भी अपनी यात्रा-वृत्तांत में इस गुफा और यहां बनने वाली बर्फ की संरचनाओं का वर्णन किया है।
3.⁠ ⁠बुटा मलिक की ‘पुनर्खोज’ की कथा लोकप्रिय
19वीं शताब्दी से जुड़ी एक लोकप्रिय लोककथा जरूर प्रचलित है। इसके अनुसार, बुटा मलिक नाम के एक मुस्लिम चरवाहे को एक साधु ने कोयले की पोटली दी। घर पहुंचने पर

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