पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा भोपाल की एजेंसी व राजस्व विभाग की टीम कर रही सीमांकन, 30 करोड़ में आकार लेगा प्रोजेक्ट

करीब एक साल तक घोषणा और प्रेजेंटेशन तक सीमित रहा 30 करोड़ रुपए का धारेश्वर लोक प्रोजेक्ट अब जमीन पर उतरने लगा है। भोपाल से नियुक्त एजेंसी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मंदिर परिसर व आसपास की जमीन का सीमांकन शुरू कर दिया है। सर्वे और नपती पूरी होने के बाद अंतिम लेआउट तैयार होगा, जिसके आधार पर निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रशासन का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद धारेश्वर लोक शहर की आस्था के साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बनेगा। है कि तहसीलदार दिनेश उइके ने बताया कि पहले चरण में पूरे परिसर और आसपास की जमीन का सीमांकन किया जा रहा है। प्रारंभिक सर्वे में करीब 10 बीघा मंदिर ट्रस्ट की भूमि चिह्नित हुई है। इसके अलावा आसपास की निजी भूमि और मंडी क्षेत्र की जमीन का भी रिकॉर्ड मिलान किया जा रहा है। सीमांकन और राजस्व अभिलेखों का सत्यापन पूरा होने के बाद अंतिम नक्शा तैयार किया जाएगा। जहां निजी भूमि आएगी, वहां नियमानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

धारेश्वर लोक परियोजना को उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। इसके पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में दर्शन, सत्संग, योग, हरित उद्यान और

आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे धार में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय व्यापार व रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

सिर्फ मंदिर नहीं, शहर का नया धार्मिक-पर्यटन केंद्र बनेगा

पहले चरण में सत्संग भवन बनेगा

धारेश्वर लोक परियोजना का पहला चरण करीब 3 करोड़ रुपए की लागत से शुरू होगा। इसमें 1500 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक सत्संग भवन बनाया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों की प्रतिमाएं, आकर्षक गार्डन, औषधीय उद्यान, योग क्षेत्र, पाथ-वे, बैठने की व्यवस्था, हाईमास्ट व थीम लाइटिंग तथा श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पूरी परियोजना जलाधारी की आकृति पर आधारित होगी।

मुख्य मंदिर का स्वरूप नहीं बदलेगा

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धारेश्वर मंदिर के मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। निर्माण कार्य मंदिर के पीछे उपलब्ध खाली भूमि और आसपास के क्षेत्र में होगा। भविष्य में कृषि उपज मंडी के स्थानांतरण के बाद उपलब्ध होने वाली भूमि को भी परियोजना में शामिल किया जा सकता है, जिससे धारेश्वर लोक का विस्तार और बेहतर ढंग से किया जा सके।

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