3 करोड़ भू-भाटक अटका, 1 साल से फाइल दबाए बैठा प्रशासन; कीचड़ से गुजरकर सब्जियां खरीदने को मजबूर शहरवासी
धार | इन दिनों धार शहर की थोक सब्जी मंडी की तस्वीर बदहाल और खौफनाक हो चुकी है कि इसे ‘सब्जी मंडी’ के बजाय ‘कीचड़ मंडी’ कहना ज्यादा मुनासिब होगा। जिला परिवहन कार्यालय (RTO) के सामने चल रही इस अस्थायी मंडी में व्यापारी घुटनों तक भरे गंदे पानी और कीचड़ के बीच बैठकर व्यापार करने को मजबूर हैं। वहीं, अलसुबह शहरभर से आने वाले फुटकर व्यापारी और आम नागरिक रोज इस दलदल में फिसलते-संभलते खरीदारी कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, मंडी को नया ठिकाना दिलाने की प्रशासनिक कवायद कागजी पेंच में उलझकर रह गई है।
कोरोना में हुई थी ‘अस्थायी शिफ्टिंग’, 5 साल बाद भी न सीसी सड़क बनी न ड्रेनेज
थोक सब्जी मंडी सालों तक शहर के मध्य स्थित मोतीबाग चौक में संचालित होती थी। वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के दौरान भीड़ नियंत्रण और सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर इसे आरटीओ कार्यालय के सामने खुले मैदान में अस्थायी रूप से शिफ्ट कर दिया गया था।
प्रशासन ने इसे ‘अस्थायी’ कहा था, लेकिन 5 साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है। जिस मैदान में मंडी लग रही है, वहां न तो सीमेंट-कंक्रीट (CC) की पक्की सड़क बनाई गई और न ही जल निकासी (Drainage) का कोई इंतजाम हुआ। नतीजा यह है कि हर बारिश में यह पूरा परिसर दलदल बन जाता है।


8 हेक्टेयर जमीन तो मिली, पर ‘कंजर्वेशन लैंड’ का पेंच अटका
वर्ष 2024 में मंडी प्रशासन ने इसे पक्के और सुविधायुक्त परिसर में शिफ्ट करने की योजना बनाई। इसके लिए आमखेड़ा में मेडिकल कॉलेज के सामने 8 हेक्टेयर (लगभग 20 एकड़) शासकीय भूमि की पहचान कर उसे मंडी के नाम आवंटित भी कर दिया गया।
लेकिन असली पेंच आवंटन के बाद फंसा। जब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और राजस्व विभाग ने जमीन की जांच की, तो पता चला कि आवंटित भूमि ‘कंजर्वेशन लैंड’ (संरक्षित भूमि) के अंतर्गत दर्ज है। नियमानुसार जब तक इस जमीन का उपांतरण (Land Use Conversion) नहीं हो जाता, तब तक यहां एक ईंट भी नहीं रखी जा सकती।
3 करोड़ का भू-भाटक अटका:
उपांतरण की प्रक्रिया पिछले 1 साल से प्रशासनिक फाइलों में दम तोड़ रही है। जब तक जमीन कंजर्वेशन लैंड से मुक्त नहीं होती, मंडी प्रशासन राजस्व विभाग को 3 करोड़ रुपये का भू-भाटक (लीज फीस) जमा नहीं कर सकता और न ही मास्टर प्लान पास हो पाएगा।
इनसाइट: उपांतरण मिला तो भी पूरी जमीन पर नहीं बन पाएगी मंडी
आमखेड़ा की इसी जमीन पर इससे पहले मेडिकल कॉलेज का पेंच भी फंसा था। वहां भी कंजर्वेशन लैंड हटाने में एक साल का वक्त लगा था।
NGT का नियम बनेगा नया अड़ंगा:
कंजर्वेशन लैंड से मुक्त होने के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े नियम लागू होंगे। नियमों के मुताबिक ऐसी जमीनों पर केवल 30% हिस्से पर ही पक्का निर्माण किया जा सकता है, जबकि 70% हिस्सा खुला/ग्रीन बेल्ट रखना अनिवार्य होता है। ऐसे में यदि 8 हेक्टेयर जमीन का उपांतरण हो भी जाता है, तो पूरी जमीन पर मंडी का निर्माण संभव नहीं होगा।
जिम्मेदार बोले…
“कंजर्वेशन लैंड को लेकर जमीन उपांतरण (Land Conversion) की फाइल तैयार कर राज्य शासन को भेज दी गई है। वहां से गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही आगे का निर्माण और शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।”
— एम.आर. जमरा, मंडी सचिव, धार



