धार। 15 सितंबर को प्रस्तावित वराह मार्च को लेकर धार में प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस ने मंगलवार सुबह बड़ी कार्रवाई करते हुए आयोजन से जुड़े आठ लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि इन लोगों से शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी।
सुबह करीब सात अलग-अलग पुलिस टीमों ने संबंधित लोगों के घरों पर पहुंचकर उन्हें हिरासत में लिया। इसके बाद सभी को थाने लाया गया। पुलिस के मुताबिक इन्हें आगामी 24 घंटे तक अभिरक्षा में रखा गया है। कार्रवाई में आयोजन से जुड़े प्रमुख व्यक्ति आशीष बसु को भी हिरासत में लिया गया है।
शहर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस की नजर
वराह मार्च को देखते हुए धार शहर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब दो दर्जन थाना प्रभारी, 10 एसडीओपी और डीएसपी स्तर के अधिकारियों के साथ अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है।
शहर के संवेदनशील और प्रमुख चौराहों पर फिक्स पॉइंट बनाए गए हैं। इसके अलावा पुलिस के मोबाइल वाहन लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में गश्त कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
पुलिस ने इन 8 लोगों को लिया हिरासत में
एएसपी विजय डावर के अनुसार पुलिस ने विकास जाट, लोकेश यादव, आशीष बसु, सत्यनारायण रघुवंशी उर्फ टू-टू ठाकुर, संदीप यादव, बाला उर्फ विक्रम पिता मधुकर राव, बाला उर्फ स्वप्निल सितोले और दीपक उर्फ रोहित सांठे को बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत अभिरक्षा में लिया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई है। एएसपी ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी रह सकती है।

गंजीखाना की संरक्षित इमारत मंगलवार को बंद
वराह मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने गंजीखाना स्थित पुरातत्व संरक्षित इमारत को मंगलवार को आमजन के लिए बंद रखने का आदेश जारी किया है। मौके पर सूचना भी चस्पा की गई है।
ASI ने चेतावनी दी है कि संरक्षित परिसर में किसी भी प्रकार का अनधिकृत प्रवेश या गतिविधि किए जाने पर प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
ऐतिहासिक इमारत को लेकर अलग-अलग मान्यताएं
गंजीखाना स्थित इस ऐतिहासिक इमारत को लेकर लंबे समय से अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं रही हैं। हिंदू पक्ष इसे ‘विजय मंदिर’ के नाम से संबोधित करता है, जबकि मुस्लिम समाज में इसे ‘लाट मस्जिद’ के नाम से जाना जाता है।
हिंदू मान्यता के अनुसार इस स्थल का निर्माण परमार वंश के राजा भोज के शासनकाल में 11वीं शताब्दी के दौरान हुआ था। इमारत के बाहर मौजूद विशाल लौह स्तंभ (लाट) भी इस परिसर की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह स्थल लंबे समय से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है। पूर्व में यहां निर्धारित अवसरों पर दोनों पक्षों को धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों की अनुमति दी जाती रही है।

मार्च को लेकर स्थिति पर नजर
पुलिस कार्रवाई और ऐतिहासिक स्थल को बंद किए जाने के बाद अब प्रशासन की नजर प्रस्तावित वराह मार्च पर है। शहर में सुरक्षा बढ़ाए जाने के साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल शहर में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।



