धार वन मंडल द्वारा वन भूमि संरक्षण एवं अतिक्रमण नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। वन विभाग के मैदानी अमले ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, ग्राम वन समिति, स्थानीय जन प्रतिनिधियों के सहयोग से जनवरी से मई 2026 के बीच 7 वन परिक्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए कुल 589.63 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।

वन मंडल अधिकारी विजयानंधम टीआर के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई। जानकारी के अनुसार जनवरी से मई 2026 तक मुक्त कराए गए अतिक्रमण के तहत परिक्षेत्र धार में 100.55 अतिक्रमण क्षेत्र का रकबा (हेक्टेयर में) मुक्त कराया गया है। इसी प्रकार धामनोद में 35.10, मांडू में 50.78, सरदारपुर में 50.62, टाण्डा में 93.76, बाग में 202.82 तथा कुक्षी में 56 अतिक्रमण क्षेत्र का रकबा (हेक्टेयर में) मुक्त कराया गया है।
इस तरह कुल 589.63 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। वन विभाग के अनुसार यह पूरी कार्रवाई अत्यंत शांतिपूर्ण, विधिसम्मत एवं सुनियोजित तरीके से संपन्न की गई। विभाग का उद्देश्य वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर उसका पुनर्वनीकरण करते हुए प्राकृतिक वन संपदा का संरक्षण एवं संवर्धन करना है।

सागौन का जंगल होगा तैयार
अतिक्रमण से मुक्त कराई गई भूमि पर वर्षाकाल 2026 में सागौन (रूट-शूट) रोपण किया जाएगा। इसके लिए धार वन मंडल स्तर पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर वन अधिकारियों एवं मैदानी कर्मचारियों को वैज्ञानिक पद्धति से सागौन रूट-शूट रोपण, पौध संरक्षण एवं रखरखाव का प्रशिक्षण प्रदान किया गया, ताकि रोपण कार्य गुणवत्तापूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हो सके। वन विभाग द्वारा आमजन से अपील की है कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न करें। वन भूमि सार्वजनिक एवं प्राकृतिक संपदा है, जिसका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। वन मंडल अधिकारी विजयानंथम टीआर ने कहा कि वन भूमि पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति वन भूमि पर अतिक्रमण करता है अथवा ऐसा करने का प्रयास करता है, तो उसके विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 एवं शासकीय संपत्ति को नुकसान पुहंचाने के फलस्वरूप वन अपराध प्रकरण के साथ एफआईआर भी दर्ज कर विधिक प्रावधानों के अंतर्गत सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। धार वन मंडल द्वारा वन संरक्षण, अतिक्रमण नियंत्रण एवं व्यापक वृक्षारोपण के माध्यम से हरित आवरण बढ़ाने तथा वन संपदा के दीर्घकालीन संरक्षण के लिए अभियान निरंतर जारी रहेगा।



