इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग (धार/सुनारखेड़ी)।
लागत ₹120 करोड़, लंबाई महज़ 1.5 किलोमीटर… और दावों का गुब्बारा फूटने में वक्त लगा सिर्फ 90 दिन!
इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुनारखेड़ी फाटे के पास बन रहे बहुप्रचारित रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के निर्माण में भारी भ्रष्टाचार और गुणवत्ता की अनदेखी का मामला सामने आया है। महज़ 3 महीने पहले जिस एक लेन पर ट्रैफ़िक शुरू किया गया था, वह पहली ही बारिश में पूरी तरह जर्जर हो चुकी है।
हालत यह है कि अब यह ओवरब्रिज सहूलियत देने के बजाय वाहन चालकों के लिए ‘मौत का जाल’ बनता जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
- आपाधापी में शुरुआत: मार्च 2024 में पीथमपुर से धार के बीच टॉवर वैगन इंजन की टेस्टिंग के नाम पर 12 मार्च को हड़बड़ी में ROB की एक लेन पर दोनों ओर का ट्रैफिक चालू कर दिया गया था।
- 90 दिन में खुली पोल: भारी वाहनों की आवाजाही शुरू होते ही मात्र 3 महीने के भीतर ढलान वाले 300 मीटर हिस्से से डामर गायब हो गया और सड़क महज़ गिट्टियों का ढेर बनकर रह गई।
- CC रोड की भी निकली हवा: डामर उखड़ने के बाद अब कंक्रीट (CC) सड़क की गुणवत्ता की भी धज्जियां उड़ चुकी हैं। 1 किलोमीटर के दायरे में 12 से ज़्यादा गहरे गड्ढे हो चुके हैं, दरारें उभर आई हैं और लोहे के तीखे सरिए बाहर निकल आए हैं।


बहानेबाज़ी या बदइंतज़ामी? अफ़सरों के गोलमोल दावे
जुलाई में जब डामर उखड़ा, तो रेलवे अफ़सरों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि “अभी डामर की आखिरी परत डालना बाकी है।” इसके बाद पैचवर्क का नाटक भी हुआ, लेकिन वह भी पहली बारिश नहीं झेल सका।
अब अधिकारी पूरे 300 मीटर हिस्से से डामर हटाकर डब्ल्यूएमएम (WMM) करने का नया तर्क दे रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब निर्माण कार्य प्रगति पर था, तो बिना पुख्ता तैयारी और बिना सुरक्षा मानकों के ट्रैफिक शुरू ही क्यों किया गया?
तब्दील हो सकता है बड़े हादसे में!
इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे होने के कारण यहाँ चौबीसों घंटे भारी वाहनों (ट्रकों/ट्रेलरों) की आवाजाही रहती है।
बड़ा ख़तरा:
- बारिश के पानी में छिपे गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालक लगातार फिसल रहे हैं।
- CC रोड से बाहर निकले तीखे सरियों से गाड़ियों के टायर फटने का भारी जोखिम बना हुआ है, जिससे हाईवे पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
अधिकारियों का रटा-रटाया जवाब
मामले पर जब रेलवे प्रशासन का रुख जानना चाहा, तो हमेशा की तरह गोलमोल जवाब ही मिला।
“निर्माण कार्य अभी प्रगति पर है। अगर कहीं डामर उखड़ने या CC रोड पर सरिए दिखने की शिकायत आई है, तो मैं इसे दिखवाता हूँ और जल्द से जल्द सुधार कार्य करवाया जाएगा।”
— मुकेश कुमार (पीआरओ, रेलवे)
हमारा सवाल:
क्या 120 करोड़ रुपये की जनता की गाढ़ी कमाई से बन रहे प्रोजेक्ट में इतनी बड़ी लापरवाही के लिए ज़िम्मेदार ठेकेदारों और मॉनिटरिंग अफसरों पर गाज़ गिरेगी, या फिर रेलवे प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है?



