धार। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में धार जिले में एक सराहनीय पहल देखने को मिली है। तेज बारिश और आंधी के चलते इंदौर-अहमदाबाद मार्ग स्थित कलेक्टर बंगले के सामने वर्षों पुराना दुर्लभ खुरासनी इमली (बाओबाब) का विशाल वृक्ष धराशायी हो गया था। इस ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व वाले पेड़ को बचाने के लिए जिला प्रशासन और सामाजिक संस्था ‘भू माई वेलफेयर – आओ सहेजे धरा’ ने संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाकर उसे पुनः स्थापित कर दिया।
जानकारी के अनुसार, पेड़ गिरने के बाद उसके भविष्य को लेकर पर्यावरण प्रेमियों में चिंता का माहौल था। मामले की गंभीरता को देखते हुए धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा के निर्देशन में पेड़ के संरक्षण की कार्ययोजना तैयार की गई। इसके बाद विशेषज्ञों की सलाह, आधुनिक मशीनों और क्रेन की सहायता से पूरे वैज्ञानिक तरीके से पेड़ को दोबारा उसकी मूल जगह पर स्थापित किया गया।
पुनर्स्थापन कार्य के दौरान पेड़ की जड़ों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उसे आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने और मजबूती से खड़ा रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं। इस कार्य में एमपीईबी के धर्मेंद्र रघुवंशी एवं उनकी टीम ने भी तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

‘आओ सहेजे धरा’ संस्था के सदस्यों ने बताया कि यह केवल एक पेड़ को बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि धार की ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना है कि प्रशासन के सहयोग और सामूहिक प्रयासों के कारण इस दुर्लभ प्रजाति के वृक्ष को नया जीवन मिल सका।
संस्था ने उम्मीद जताई है कि उचित देखभाल और नियमित निगरानी से यह बाओबाब का पेड़ फिर से हरा-भरा होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणास्रोत बनेगा।
पर्यावरण प्रेमियों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे प्रकृति संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण बताया है। संस्था ने नागरिकों से अपील की है कि वे पेड़ की सुरक्षा और संरक्षण में सहयोग करें, ताकि धार की यह ऐतिहासिक प्राकृतिक धरोहर लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।



