प्रदेश में 26वीं रैंक और डी ग्रेड हर टीएल में अफसरों की क्लास लग रही, राजस्व, पंचायत, गृह व नगरीय विभाग सबसे ज्यादा फिसड्डी
धार । जनता की शिकायतों का समय पर और संतुष्टिपूर्ण समाधान कराने के लिए बनाई गई सीएम हेल्पलाइन जिले में अब खुद ही हेल्पलेस नजर आ रही है। जून में जिले से 7130 शिकायतें दर्ज हुई, लेकिन अफसर सिर्फ 1264 शिकायतों का ही संतुष्टिपूर्वक निराकरण करा सके। यानी हर 100 शिकायतों में 82 शिकायतकर्ताओं को अब भी राहत नहीं मिली। हालत यह है कि 933 शिकायतें 50 दिन से ज्यादा समय से फाइलों में दबी पड़ी हैं, जबकि 704 शिकायतों को निम्न गुणवत्ता बताकर बंद कर दिया गया। लगातार खराब प्रदर्शन का नतीजा यह रहा कि धार जिला प्रदेश की रैंकिंग में डी ग्रेड में पहुंच गया। सबसे ज्यादा शिकायतें पंचायत, गृह, राजस्व और नगरीय विभाग से जुड़ी हैं, जहां लोगों को सबसे अधिक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
हर टीएल में समीक्षा, फिर भी , फिर भी हालत खराब
कलेक्टर राजीव रंजन मीना हर टीएल बैठक में लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर लगातार सख्त निर्देश दे रहे हैं, लेकिन स्थिति नहीं सुधर रही। 29 जून की बैठक में भी सीएम हेल्पलाइन की पेंडिंग शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए गंभीरता से संतुष्टि के साथ शिकायतें बंद कराने को कहा था। फिर भी लंबित मामलों का अंबार लगा हुआ है।
गृह विभागः एफआईआर से लेकर गिरफ्तारी तक लोग परेशान
गृह विभाग में 1203 शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन सिर्फ 166 शिकायतों का समाधान हो सका। 147 शिकायतें 50 दिन बाद भी लंबित हैं। सबसे ज्यादा 552 शिकायतें एफआईआर दर्ज नहीं होने, 470 विवेचना में देरी, 39 आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने, 38 महिला अत्याचार, 35 पुलिस के व्यवहार और 12 झूठी एफआईआर से जुड़ी हैं। यानी कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में भी शिकायतकर्ता राहत के लिए भटक रहे हैं।
नगरीय विभागः पानी नहीं, स्ट्रीट लाइट नहीं और कोई समाधान भी नहीं
नगरीय विकास विभाग में 910 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 148 शिकायतों का समाधान हुआ, जबकि 149 शिकायतें 50 दिन से ज्यादा समय से लंबित हैं। 197 शिकायतें पानी की सप्लाई, 59 अवैध कब्जे, 48 स्ट्रीट लाइट, 30 पीएम आवास की राशि और 20 गंदा पानी सप्लाई से जुड़ी हैं। यानी शहर की बुनियादी सुविधाओं पर भी शिकायतों का अंबार लगा हुआ है।
पंचायत विभागः सबसे ज्यादा शिकायतें, समाधान सबसे कम
सबसे ज्यादा 1281 शिकायतें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के खिलाफ दर्ज हुई। इनमें से सिर्फ 209 शिकायतों का समाधान हुआ, जबकि 212 शिकायतें दो महीने बाद भी लंबित हैं। नल-जल योजना, अधूरे निर्माण, प्रधानमंत्री आवास की राशि, गांवों में सफाई, जल निकासी, सरपंच-सचिव की अनुपस्थिति और फर्जी भुगतान जैसी शिकायतों पर कार्रवाई की रफ्तार सुस्त है।
राजस्व विभागः जमीन के विवादों में सबसे ज्यादा इंतजार
राजस्व विभाग में 997 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें सिर्फ 106 शिकायतों का समाधान हो सका, जबकि 128 शिकायतें 50 दिन बाद भी लंबित हैं। 167 निजी जमीन पर कब्जा, 162 सीमांकन, 113 शासकीय भूमि पर अतिक्रमण, 107 पीएम किसान सम्मान निधि, 101 खसरा अपडेट और 91 रास्ता विवाद जैसी शिकायतें सबसे ज्यादा हैं।
कृषि विभाग : खाद-बीज व फसल बीमा लिए किसान भी परेशान
कृषि विभाग में 108 शिकायतें आईं। इनमें 32 शिकायतों का समाधान हुआ, जबकि 13 शिकायतें अभी भी लंबित हैं। 54 शिकायतें खाद, 18 बीज, 11 फसल बीमा, 7 भावांतर भुगतान और 2 बोनस से संबंधित हैं।



