इंदौर । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार जिले के सरदारपुर विकासखंड स्थित बागसा आंगनवाड़ी केंद्र में आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता ममता सिंगार के पक्ष में निर्णय दिया है। न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की एकलपीठ ने आयुक्त, इंदौर संभाग एवं अपर कलेक्टर, धार द्वारा पारित आदेशों को निरस्त करते हुए ममता सिंगार को तत्काल सेवा में बहाल करने तथा सभी सेवा लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रसन्ना आर. भटनागर के साथ अधिवक्ता कनिष्क श्रीवास्तव ने पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि ममता सिंगार ने आवेदन की अंतिम तिथि से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज विधिवत जमा किए थे, जबकि प्रतिवादी पक्ष ने आवश्यक जाति प्रमाण-पत्र निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत नहीं किया था।
क्या था मामला?
वर्ष 2023 में सरदारपुर परियोजना अंतर्गत आंगनवाड़ी सहायिका पद के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। ममता सिंगार ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के तहत आवेदन कर चयन प्रक्रिया में 80 अंक प्राप्त किए और 5 अक्टूबर 2023 को उनकी नियुक्ति हुई। बाद में दूसरे अभ्यर्थी की अपील पर अपर कलेक्टर, धार ने नियुक्ति निरस्त कर दी, जिसे आयुक्त, इंदौर संभाग ने भी बरकरार रखा। इसके बाद ममता सिंगार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मूल रिकॉर्ड का परीक्षण किया और पाया कि याचिकाकर्ता के आवेदन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज स्पष्ट रूप से संलग्न थे, जबकि प्रतिवादी के रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां थीं। न्यायालय ने टिप्पणी की कि मूल अभिलेखों का समुचित परीक्षण नहीं किया गया तथा रिकॉर्ड में बाद में दस्तावेज जोड़े जाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में अपीलीय अधिकारियों के आदेश कानून सम्मत नहीं पाए गए।
कोर्ट के निर्देश
हाईकोर्ट ने आयुक्त, इंदौर संभाग का 13 नवंबर 2024 तथा अपर कलेक्टर, धार का 24 जून 2024 का आदेश निरस्त कर दिया। साथ ही ममता सिंगार को तत्काल आंगनवाड़ी सहायिका के पद पर बहाल करने, सेवा समाप्ति की तिथि से 100 प्रतिशत बकाया वेतन सहित सभी सेवा लाभ देने तथा 60 दिनों के भीतर आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।



