इंदौर क्राइम ब्रांच ने चिटफंड और बीसी (कमेटी) के नाम पर लोगों से लाखों रुपए लेकर धोखाधड़ी करने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों ने एक दर्जन से अधिक लोगों और व्यापारियों से निवेश के नाम पर बड़ी रकम लेकर वापस नहीं लौटाई। शिकायतों की जांच के बाद क्राइम ब्रांच ने धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया है।

क्राइम ब्रांच के अनुसार नरेश उर्फ गुड्डू पिपले निवासी रानीपुरा शोएब अब्बासी और कपिल गोलिया के खिलाफ विभिन्न शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की गई है। शिकायतकर्ताओं में विकास धुलधोय, मनोज अहिरवार, अरुण बड़के, हरीश राजौरा सहित अन्य लोग शामिल हैं।

बीसी फंड के नाम पर लिए लाखों रुपए

जांच में सामने आया कि वर्ष 2022 में विकास धुलधोय की पहचान उनके एक परिचित ने नरेश से कराई थी। इसके बाद विकास और उनके साथी मनोज ने करीब सात लाख रुपए एक बीसी फंड में जमा किए, जिसमें दस सदस्य शामिल थे। आरोप है कि नरेश को फंड का संचालक बनाया गया था, जबकि कपिल उसका साझेदार था और जमा होने वाली राशि उसी के पास रहती थी।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जब नरेश की बारी आई तो उसने सदस्यों को भुगतान नहीं किया। इसके विपरीत उसने फंड से कई बार किश्तों में रकम निकालकर अपने पास रख ली। आरोप यह भी है कि वह अधिकांश लेन-देन नकद करता था और ऑनलाइन भुगतान से बचता था। जब निवेशकों ने पैसे वापस मांगे तो उसने कथित तौर पर आत्महत्या कर सभी को फंसाने की धमकी दी। इस पूरे मामले में शोएब अब्बासी पर भी सहयोग करने का आरोप है।

व्यापारियों से भी लाखों रुपए लेने का आरोप

क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी नरेश ने चूड़ी व्यापारी अरुण बड़के से करीब 29 लाख रुपए लिए थे। इसके अलावा कई अन्य व्यापारियों से भी बीसी और फंड के नाम पर लाखों रुपए लेकर भुगतान नहीं किया गया।

शिकायतकर्ताओं ने जांच के दौरान अपने बयान दर्ज कराए और आरोपियों के साथ हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग सहित अन्य दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए हैं।

पहले कई थानों में हुई थीं शिकायतें

पुलिस के अनुसार आरोपियों के खिलाफ 40 से अधिक लोगों ने पहले सेंट्रल कोतवाली अन्नपूर्णा और पलासिया थाना क्षेत्रों में लिखित शिकायतें दी थीं। कार्रवाई नहीं होने पर मामला क्राइम ब्रांच तक पहुंचा, जहां विस्तृत जांच के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।

क्राइम ब्रांच का कहना है कि मामले की जांच जारी है और शिकायतकर्ताओं की संख्या तथा कथित वित्तीय लेन-देन की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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